मुराबहा: पहचानी गई संपत्ति और स्पष्ट बिक्री मूल्य
मुराबहा ऐसी बिक्री व्यवस्था है जिसमें वित्तदाता पहचानी गई संपत्ति खरीदता है और ग्राहक को घोषित लागत तथा तय लाभ जोड़कर बेचता है। सामूहिक वित्तपोषण वाली परियोजना में दस्तावेजों से स्पष्ट होना चाहिए कि संपत्ति कौन खरीदता है, स्वामित्व और जोखिम कब हस्तांतरित होते हैं तथा निवेशकों के अधिकार बिक्री से मिलने वाली राशि से कैसे जुड़े हैं। बिना समझाए नकद अग्रिम को केवल संपत्ति का नाम देना पर्याप्त नहीं है। आपूर्तिकर्ता के बिल, डिलीवरी का विवरण, भुगतान कार्यक्रम और खराब या न मिले सामान के समाधान जांचें। Eisar के प्रकाशित वित्तपोषण विवरण भारतीय सहकारी उदाहरण देते हैं, जिनका सदस्यता और वास्तविक अनुबंध के अनुसार मूल्यांकन होना चाहिए।
इजारा: संपत्ति के उपयोग के लिए भुगतान
इजारा में तय अवधि और किराए पर संपत्ति के उपयोग का अधिकार दिया जाता है। समझौते में स्वामित्व संबंधी जिम्मेदारियां, संचालन खर्च, नुकसान का जोखिम और समय से पहले समाप्ति के परिणाम स्पष्ट होने चाहिए। बाद में स्वामित्व हस्तांतरण की अलग स्पष्ट शर्तें आवश्यक हैं; किराया देने से पट्टेदार अपने आप मालिक नहीं बन जाता। Cheraman अपनी जमा स्वीकार न करने वाली NBFC गतिविधियों में उपकरण पट्टे का वर्णन करती है। इस संस्थागत सेवा से किसी असंबंधित क्राउडफंडिंग मंच का जनता से धन जुटाकर पट्टों में लगाना वैध सिद्ध नहीं होता। पूंजी देने से पहले प्रस्तावित निवेश संस्था, प्रबंधन शुल्क, बीमा व्यवस्था और बाहर निकलने की प्रक्रिया जांचें।
